कब तक  तुम  किसी 
और  से उम्मीद लगाओगी...... 
किससे  रक्षा मांग रही हो 
जो  खुद  इंसान के रूप मे 
दानव बने घूम रहे है..... 
जो खुद की इज्जत बेच चुके है 
वो तुम्हारी क्या इज्जत लूटेंगे..... 
सुनो ! शेरनियों ये उम्मीद 
ये क़ानून  का सोचना छोड़ कर..... 
महादेव का नाम लेकर 
उनका  त्रिशूल  उठा कर 
चामुंडा के दर्शन करा दो..... 
जो  तुम्हें  दानव की 
नजरों से देखे....... !!!!!



     श्रेया सचान