सुधा ओर देव की शादी को अभी कुछ महीने ही हुए थे |
अचानक से देव के पिताजी स्वर्ग सिधार गए |
अब घर में देव, उसकी माँ, छोटी बहन रेखा ओर सुधा ही रह गए |
घर की सारी जिम्मेदारियों अब देव के कंधे पर आ गयी |
देव एक छोटे व्यापारी के यहाँ , जो आस पास के बाजारों में कपड़ों की छोटी सी दुकान लगाता है वहां काम करता था |
देव की इतनी ही आमदनी हो पाती की दो वक़्त की रोटी परिवार को नसीब हो जाती |
लेकिन देव हार मानने वालों में से कहा था सबके भविष्य की चिंता के लिए वह जी तोड़ मेहनत करने लगा |
देखते देखते ठंड का मौसम आ गया |
ठंड के मौसम ने देव की परेशानी को और बढ़ा जिसका मुख्य कारण यह था कि देव के पास दुकान जाने के लिए कोई भी साधन नहीं था |
अब तो देव की यह दिनचर्या बन चुकी थी वह सुबह सात बजे पेदल ही दुकान पर चले जाता |
कपड़ा दुकान देव के घर से छह किलोमीटर की दूरी पर थी |
जैसे तैसे घर गृहस्ती भी ठीक ठाक चल रही थी किन्तु जाड़े के मौसम में देव को रोज ठिठुरते हुए जाना पड़ता था जो बात जो सुधा को बिल्कुल भी पसंद नहीं थी |
सुधा ने काफी बार देव से कहा की आप कपड़े की दुकान में काम करते हैं आप अपने लिए भी एक स्वेटर खरीद ले | पैसे आपकी तनख्वाह में से कटवा दीजिए लेकिन देव साफ़ मना कर देता कि मुझे इतनी ठंड नहीं लगती है |
देव झूठ बोल रहा हैं सुधा यह बात भली - भाँति जानती |
देव के मन में यह विचार चल रहा था कि सुधा के पास भी स्वेटर नहीं है और वह भी ठंड में ठिठुरते हुए काम करती है तो क्यों ना इस बार की तनख्वाह की बचत में से सुधा के लिए स्वेटर लाया जाए |
सुधा के मन मे यह विचार था की सिलाई के पेंसो से देव के लिए स्वेटर लाया जाए |
कुछ ही दिनों बाद सुधा के मायके मे शादी आ गयी।
सुधा वहां जाने की तेयारी करने लगी लेकिन देव को छुट्टी ना होने के कारण वह
जा नहीं सकता था
इसीलिए सुधा के भाई सुधा को लेने आ गए , ओर सुधा उनके साथ चल पड़ी।
अपने काम से छुट्टी लेकर भागते हुए देव भी स्टेशन तक पहुंचा |
ट्रेन आ चुकी थी और सुधा उस ट्रेन में बैठ चुकी थे।
देव ट्रेन के हर डब्बे को देखते हुए आखिरकार सुधा तक पहुंच गया |
देव को देखकर सुधा मुस्काई लेकिन गाड़ी ने हार्न दे दिया |
देव से कुछ कहा नहीं गया और देव ने अपने हाथ में से एक बॉक्स सुधा के हाथ में थमा दिया।
ओर गाड़ी चल पड़ी |
देव बहुत खुश हुआ ठंड के मौसम में ठिठुरते अपने घर आ गया |
भोजन करने के बाद देव अपने कमरे में जाकर लेट गया तभी तकिये के पास देव को एक बॉक्स दिखा।
उस बॉक्स को खोलते से ही देव की आंखों में आंसू झलक पड़े |
उस बॉक्स में स्वेटर और एक खत मिला जो शायद सुधा ने लिखा था
प्रिय देव मैं जानती हूँ तुम्हे ठंड लगती है, लेकिन हमारे भविष्य को बेहतर करने के लिए ही तुम इतनी सारी तकलीफ उठा रहे हो ...
मैं यह बात अच्छी तरह से जानती हूँ
तुम्हारी पहली प्राथमिकता परिवार है इसीलिए हमारी हर जरूरत को पूरा करने के लिए तुम अपनी छोटी छोटी जरूरतों को पूरा नहीं करते हो |
लेकिन मैं तुम्हारी पत्नी हूँ तुम्हारी हर बातों को बखूबी जानती हूँ।
यह एक छोटा सा तोहफा
तुम्हारे लिए ......
काजल हर्ष

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