जिसे देख जीती रही
दिल में गम ,गम में हम
आँखे रहती बेहद नम
फिर भी किसी ओट से निहारती रही
हाँ वो यादें ही तो थी
जिनसे बेपनाह इश्क़ करती रही
रोती थी सिरहाने रखकर खत तेरे
आंखो में नींदे रहती ख्वाब के थे बसेरे
कभी-कभी स्पन्दन सा उठता
हिलोर उठती थी
हाँ वो यादें यादें ही तो थी
पतझड़ में सावन सा अहसास देती
हाँ वो यादें ही तो थी
अनजाने कभी आ जाती
अधरों पर मुस्कुराहट
वजह शायद फिर वही
हाँ वो यादें ही तो थी
कृष्णा की✍️ कलम से

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