टूटे हुई तस्वीरें बिखरे हुए पत्ते 
दोनों ही रखते है खुद मे ही उलझें उलझें 
तस्वीरें कभी बोल नहीं करती 
बीती हुई दस्तानो पे आँसू बहाया नहीं करती 
साख से टूटे हुए पत्ते फिर से पेड़ पे सजाया नहीं करते 
गिरे हुए को वो भी उठाया नहीं करते 
तस्वीरें दीवारों पर सजी रहती 
एक बेबसी सी नज़रो से सबको निहारती रहती 
पत्ते सूखे तरसते हुए  फर्श पर पड़े  रहते 
सब के पैरो मे कुचलते हुए एक अहा लिए खुद को ही मरते हुए देखते रहते 
तस्वीरें अभी हँसती तो कभी बीती बातो से यादों 
को याद कर आँसु बहती 
पत्ते बिचारे अपनी जनम देने वाली से जुदाई का 
एहसास लिए फ़ना हो  जाते 
दुबारा मिलने की ख्वहिश मे अपनी ही हसरतों को मिटा देते 




                   ‌ आलिया खान....