बचपन बिकता है
तोल मोल के भाव बिकता है
छोटे छोटे हाथों और
मासूम चेहरे पर दर्द दिखता है

बचपन बिकता है
तोल मोल के भाव बिकता है
ख्वाहिश है
दो रोटी खाने की
वरना भूखे पेट में कपड़ा 
बांध कर सो जाना की

बचपन बिकता है 
तोल मोल के भाव बिकता है
नीरस आंखे,सूरख होंठ
फटे कपड़े,नंगे पांव
चिलचिलाती धूप 
बिना छतरी के
बरसात में
मजदूरी करना
सर पे झोपड़ी न
हो तो सो जाते
है गलियारा
या सड़क में

बचपन बिकता है
तोल मोल के भाव बिकता है
मजदूरी करते छोटे -छोटे बच्चे
मेहनतना भी ना पूरा पाना
हट जा परे छोरे
यूं कहकर टरकाना

बचपन बिकता है
तोल मोल के भाव बिकता है
पापी पेट का सवाल है
कुछ ना मिले तो कूड़ा
करकट से उठाकर खाना


बचपन बिकता है 
तोल मोल के भाव बिकता है
खिलौना ‌खेलने की उम्र में
खिलौना बेचते हैं 
दो वक़्त की रोटी के लिए

बचपन बिकता है 
तोल मोल के भाव बिकता है
छोटे छोटे खुशी से खुश हो जाते ये बच्चे
दुख और गम मे भी ना घबराते हैं ये बच्चे
होसलो को बुलंद कर हर पल मुस्कुराते हैं ये बच्चे
खुदा की रहमत में रहकर पलते हैं मजदूर बच्चे

शिल्पा मोदी ✍️✍️