ओ दुनिया से विदा लेने वाले
जरा ये तो बताते जाना
तू रहता कहाँ है
कहाँ है तेरा ठिकाना
मुझसे दूर रहकर गगन मे
करते हो क्या 
जरा ये तो बताना
माना शरीर पंँच तत्व मे विलिन हो गया
आत्मा परमात्मा से मिल गई
मेरा क्या ..कयूँ बनाया ये रिश्ते नाते
मोहपाश मे बाँधे प्रीत के धागे
कर्म करने ही आना था दुनिया मे
क्यों बाँधा बँधन के धागे मे
हर क्षण नजरो मे तस्वीरों की तरह
स्मृति की रील घूमती है
संँताप मे जीवन बिताऊँ
आँसु बहाऊँ.या उन क्षणों
को याद कर मुस्कुराऊँ
ईश्वर से ही शिकायत करूँ 
झूठा ये संँसार है 
झूठी मोहमाया है
ओ दुनिया बनाने वाले 
जरा मेरे सवाल का जवाब देते जाना

शिल्पा मोदी✍️