पुरुष शिव है,
नारी है शक्ति!
दोनों है सृष्टि की,
अनुपम कृति!
नारी देती जीवन है,
घर को करती रौशन है!
पर इस सब के पीछे,
पुरुष का ही समर्पण है
" नारी " हरी भरी पेड़ सी,
"बच्चे" शाखा और पत्ते हैं
पर पुरुष जड़ के समान,
बनाए रखते सन्तुलन हैं!
पुरुष दिनभर कमाए,
तब तो नारी घर चलाए,
दोनों का हो बराबर मान!
करें एक दूसरे का सम्मान
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श्वेता कर्ण!

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