गम के आँसू भी कभी पीती हूँ तो पीने दो
राह कठिन है कांटो की ,चलती हूँ तो चलने दो
जीवन कोई खेल नहीं, विधाता की नेमत है
लेता है वो रोज परीक्षा, उसे परीक्षा लेने दो
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चलते चलते सीख मिलेगी ,सामर्थ्य की सौगात मिलेगी
हौसलों की उडान मिलेगी ,जीवन को पहचान मिलेगी
जितना तपेगा उतना सजेगा , चमक बढेगी बढने दो
राह कठिन है काँटों की चलती हूँ तो चलने दो
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प्यारी बगिया हरी भरी है, रंग,बिरंगे फूलों से
नये नये है रंग कयी ,कुछ कांटे भी है नागफनी से
फूलों के संग कांटे होते ,उन्हें सुरक्षा देने को
राह कठिन है काँटों की चलती हूँ तो चलने दो ।
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कृष्णा की✍️ कलम से

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