माथे बिंदिया,
नयनों में कजरा,
लट उलझी ।

हाथों पहने,
कंगना बड़े प्यारे,
मोतिन वाले ।

कटि पहने,
करधनियाँ प्यारी,
चाबी को गुच्छा ।

पहन रही,
बिछिया रुनझुन,
घुंघरु वाली ।

मैंहदी राचे,
हाथन पाँवन में,
बड़ी ही प्यारी ।

शीर्ष पे ओढ़े,
चुनरी फुलकारी,
वो नखराली ।

काव्य रचना -रजनी कटारे
      जबलपुर (म. प्र.)