मकर संक्रांति का महापर्व आया है
जीवन में उत्साह और उमंग लाया है
जीवन का आधार सूर्य आज
छोड़ धनु ,मकर राशि में आया है
रवि आज दक्षिणायन से उत्तरायण होगा
सकल धरा पर नवजीवन का आगाज होगा
होगा अद्भुत समय जब तेज से तेज मिलेगा
पितामह भीष्म का जब देह- निर्वाण होगा
नभमंडल में छायेगी एक अनोखी आभा
आशा की डोर से बंधी ,सपनों की पतंगों का शोर होगा
जब निराशा और नकारात्मकता का
आशा और सकारात्मकता में संक्रमण होगा
तभी सार्थक मकर सक्रांति का ये पर्व होगा।
रचनाकार:- आशा झा सखी

0 टिप्पणियाँ