आई देखो संक्रांति, मकर संक्रांति, 
मकर संक्रांति, मकर संक्रांति, 
आई देखो संक्रांति..... 

भानू भास्कर, हो गये उत्तरायण, 
आ गये दिवाकर, रथ  लेकर, 
आई देखो संक्रांति..... 

संग लाये देखो, रश्मि किरणों को, 
उजियारा कर दिया, जीवन में सबके, 
आई देखो संक्रांति..... 

तिल गुड़ के लड्डू ,और तिल पट्टी, 
गेहूँ, गाजर, रेवड़ी, और मटरफली,
आई देखो संक्रांति..... 

सखियों संग गोष्ठी, होगी खूब मस्ती, 
हल्दी ओ कुमकुम, होगा सुंदर नजारा, 
आई देखो संक्रांति..... 

पंतग उड़ाऐंगे, बच्चे और, बड़े बुजुर्ग,
होंगी खुशियाँ खूब, होगी घर वाली संग, 
आई देखो संक्रांति..... 

होगा खूब ढोल ढमाका, हँसगुल्लों संग, 
लोहड़ी त्यौहार मनायें हम, खुशियों संग,
आई देखो संक्रांति..... 

आई देखो संक्रांति, मकर संक्रांति, 
मकर संक्रांति, मकर संक्रांति, 
आई देखो संक्रांति.....। 

    काव्य रचना -रजनी कटारे 
          जबलपुर (म. प्र.)