मैं नहीं जानती कि तुमसे मेरा क्या नाता है रीना ने सौरभ को कहा, रीना ,मैं तुम्हें नहीं कहता कि तुम मेरे बारे में ज्यादा जानो या मेरी छोटी बड़ी खुशियों का ख्याल रखो, मैं बस इतना चाहता हूं कि तुम मेरे साथ रहो! मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो! मुझसे प्यार करती हो या नहीं करते हो, मैं बस तुम्हारा साथ चाहता हूं? सौरभ ने कहा,..... सौरभ ये जिन्दगी है! मै तुम्हारा साथ नहीं दे पाऊंगी? रीना ने कहा,..... मैं तुमसे जितना प्यार करता हूं? वह प्यार हम दोनों के लिए काफी है! सौरभ ने कहा,
सौरभ तुम जानते हो! मैं तुम्हें कभी तुम्हारे हिस्से की खुशी नहीं दे पाऊंगी? जिस पर तुम्हारा हक है रीना ने कहा,... मै जा रही हूं कहती हुईं रीना सौरभ का हाथ छुड़ाकर आगे बढ गई ?
इस बात को सुनकर और रीना के जाने से रोकने के लिए कहता हुआ नीद से उठ गया। रीना के जाने का अहसास,...यह सपना चार साल ही सच हो चुका है फिर भी ये सपना बार बार ,...हर बार लगातार मुझे क्यो परेशान कर रहा है! सौरभ बिस्तर पर बैठें हुए कहने लगा। नींद उड़ चुका था। सौरभ सपना देख रहा था।
उसके सामने रीना क्या कोई भी नहीं थी! न हीं कमरे में रीना कि कोई तस्वीर थी।बस कुछ था तो रीना और उसकी यादें थी जिससे सोच रहा था।
आप सोच रहे होंगे कि रीना कौन है? रीना और सौरभ दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं,क्या करते थे ! दोनों एक दूसरे को इतना चाहते थे कि एक दूसरे के बिना कहे ही सब कुछ समझ जाते थे!
दोनों के परिवार वालों ने उन दोनों को एक दूसरे से मिलाया था ;आज से ठीक चार साल बारह दिन और दस घंटे पहले रीना और सौरभ दोनों के माता पिता को पंडित जी के जरिए मिले थे। पंडित जी ने रीना और सौरभ दोनों की कुंडली देखकर एक झटके में कह दिए कि दोनों एक दूसरे के लिए बने हुए है !पंडित जी ने मेरे माता पिता और रीना के माता पिता को एक साथ मंदिर बुलाकर सब बाते बता दिया। मां बाऊ जी को रीना की तस्वीर देखते ही उससे शादी कराने का फैसला कर लिए।उनको वचन भी दे दिए।मंदिर में मेरी और रीना की शफी तय कर दी गई?
मै इस बात से अनजान अपने दोस्तो के साथ एक हफ्ते के पिकनिक पर गया हुआ था।जब वापस लौटा तोह मेरी मां भवानी देवी ने पानी के गिलास के जगह पर रीना की तस्वीर थामा दिए !और कुछ नहीं बोली,
तस्वीर देखकर मैंने कहा,बहुत ख़ूबसूरत लड़की है! भोली भाली और संस्कारी है, शिक्षित भी लग रहीं हैं!इतना सुनते ही मेरी मां ख़ुशी से मेरे माथे को चूम ली मेरी नजर उठती और बोली,... लाल तुझे इतनी पसंद है तोह इसे अपनी बहू बना लू ?तेरी शादी उस लड़की से करा दु? मां के शब्द को सुनकर मुझे एक सो चार डिग्री का बुखार आ गया।मेरा पूरा शरीर काप गया।फिर भी अपने डर पर काबू पाकर मां से पूछा,
मां आप ये क्या बोल रही है ? मां अंदर से मिठाई का डिब्बा ले आसी और मुझे खिला दी !में कुछ बोल ही नहीं पाया।....तब तक मेरे बाऊ जी और बड़े बाऊ जी भी आ गए ? मां सिर पर पल्लू की और बाऊ जी और बड़े बाऊ जी दोनों को बैठने के लिए बोली पानी दी।और मिठाई दी।अभी तक सारा मिठाई मेरे लिए है सोच रहा था लेकिन अभी मुझे पता चला बाऊ जी और बड़े बाऊ जी भी आने वाले थे।
लाल तू अब घोड़ी चढ़ने को तैयार हो जा उस लड़की का नाम रीना है, मंदिर की पिछे वाली गाली से सातवा मकान में अपने मां बाबू जी के साथ रहती है? इसके मां बाबू जी बड़े उच्च विचार के लोग है? मां ने कहा,
बाऊ जी मिठाई खाते हुए बोले,...लाला तेरी मां बिलकुल सही कह रही है?हम तोह तेरे आने जा ही इंतजार कर रहे थे।लेकिन एम ए कर रही ही, वो भी अग्रेंजी में,...... बड़े बाऊ जी ! कि और आश भारी नजरो से देखने लगा। मुझसे भी पूछ ले शादी करना है या नहीं करके,... बड़े बाउजी उठे!और बोले,... छोटी बहू ,लाल को एक बार उस लड़की से मिला देते है !फिर पंडित जी से सगाई और शादी की तिथि निकलवा लेंगे! बड़े बाऊ जी ने कहा,
बड़े बाऊ जी !मेरे ताशलली के लिए कह तोह दिए लेकिन मै जानता था वो किसी कि सुनते नहीं है, वे जो कह दे वह पत्थर की लकीर है !... मै कुछ बोल ही नहीं पाया।अपना सामान उठाया और बोझिल मन से अपने कमरे के पहुंच गया।सामान को फेका और बिस्तर पर गिर पड़ा।
दो घण्टे तक सोचता रहा। मां दोपहर को खाने के आवाज दी ; लेकिन मै सोने का नाटक करके नहीं गया ! मां सोते देखी और दरवाज़ा बंद करके चली गई ?
दिल कर रहा था जोर जोर से चिल्लाऊं लेकिन चिल्लाने की हिम्मत नहीं हुई ?रात के खाने के समय बड़े बाऊ जी ने एक और झटका दे दिए !...कल दोपहर को मोहन के घर जा रहे है तैयार रहना ! खाना तो खा चुका था। लेकिन ऐसा महसूस हो रहा था जैसे खाना हलक मै अटक गया है!...अगले दिन दोपहर तक बहाना ढूंढता रहा लेकिन कोई वजह नहीं मिला !मुझे जाना ही पड़ा !उनके घर पहुंचे तोह मेरे और मेरे परिवार की खूब आव भगत हुई ? मेरा चेहरा गुस्से से पल पीला हो चूका था।
आधे घंटे बीत जाने के बाद भी लड़की दिखी न ही उसका कोई चेहरा ,...दिल ही दिल मै बहुत खुश हो गया था!
साड़ी में उपर से नीचे तक लिफ्टी एक लड़की ट्रे में मिठाई और समोश लेकर आई तो मै उसे देख कर देखता रह गया।जितनी ख़ूबसूरत वो तस्वीर में लग रही थी। उससे कहीं ज्यादा सुंदर वह सामने दिख रही थी।
मै तोह बस उसे देखता रहा ! बड़े बाऊ जी मां और पिता जी की रीना के मां बाबू जी से क्या बात किय मै सुन ही नहीं पाया।रीना की खूबसूरती से कहीं ज्यादा उसकी सादगी पसंद आया।
मै बिना कुछ सुने ही सगाई के लिए हां कर दिया। महिने भर में हम दोनों की सगाई हो गई ?
रीना के बारे में जानने कि इच्छा मन में जगा और मै उसके कालेज पहुंच गया। मंजनू बनकर ,इस चक्कर में कई बार वहा के गार्ड से फटकार भी खाया।पर मिलने की आश नहीं छोड़ा। वो भी दिन आया जब मै रीना से बात कर पाया।रीना से बात करने के बाद हम दोनों का मिलना जुलना बढ़ गया
हम दोनों की पसन्द कैसे एक दूजे से प्यार में बदल गया । न रीना को पता चला न मुझे,...मेरे और उसके परिवावालो को इस बात को खबर भी नहीं थी।की हम दोनों एक दूजे से मिलते है?हम दोनों की चोरी बड़े बाऊ जी ने पकड़ लिया। मै और रीना दोनों सड़क किनारे आइसक्रीम खा रहे थे तब,.... उन्होने हम दोनों को देखा।हम दोनों डर से कप गए थे; लेकिन बड़े बाऊ जी ने तोह हम दोनों को हैरान कर दिया।
बहुत खूब बेटे कहकर वहा से चले गए! मां बाऊ जी को भी कुछ नहीं बताए ?
शादी की तिथि दो महीने बाद की निकली।मुझे ऑफिस के काम से दिल्ली जाना पड़ा।पर बनारस की बड़ी याद आयेगी ये बात मुझे अच्छे से पता था। मैंने ये बात रीना को भी बताया।रीना ने भी यही कहा कि उसे भी मेरी याद आयेगी।हम दोनों ने मिलकर एक रास्ता ढूंढे ?
एक दूजे से बात करने के लिए चांद को देखा करेंगे। और उसी की जरिए बात करेंगे।
वहीं आख़िरी मुलाक़ात था। हम दोनों की वैसी ही बाते होती रही ।घर में शादी की तैयारी जोरों पर थी।
मै आया तो मां रीना के लिए लिया हुआ गहना, साड़ी और बहुत सी चीजे को दिखाई ! उन गहनों और साड़ी को देखते हुए मै सोचने लगा।
फिर अगले दिन चोरी से रीना से मिलने चला गया। रीना मुझे देखते ही बाहर आ गई !फिर हम दोनो पैदल चलते हुए काफी दूर निकल गए!........ शादी का दिन भी आ गया। मै बारात के साथ शादी मण्डप मैरिज हॉल में इंतजार जार रहा था। लेकिन रीना आई और न ही उसका परिवार आया।बस एक चिट्ठी आई ?
जिसमे लिखा था कि वो मुझसे शादी नहीं करना चाहती।
मैं पढ़कर हल्का बक्का सा रह गया।मेरा दिल टूट गया था। मै उसके घर गया।घर सजा हुआ था; लेकिन कोई दिखाई नहीं दिए । न ही कोई रिश्तेदार और न ही कोई घर वाले,....... मै निराश घर लौट आया कुछ दिन तक मेरी हालत बहुत बुरा रहा ! फिर मेरे ऑफिस वाले ने मुझे दिल्ली भेज दिया।तब से यही हूं ? सौरभ ने कहा,
आज मेरा एक मीटिंग है!काका जल्दी से कुछ खाने को दे दो ! सौरभ ने कहा,....अभी लाता हूं ? राजू काका ने कहा,
कुछ देर बाद सौरभ तैयार होकर डायनिंग टेबल पर आकर बैठ गया।
काका ने नाश्ता दिया । सौरभ नाश्ता किया और चला गया। मीटिंग में पता चला कि उसे शाम के फ्लाइट से मुंबई जाना होगा।
सौरभ ऑफिस से घर आया और समान पैक करके एयरपोर्ट पहुंच गया। एयरपोर्ट में मुझे एक अनजानी पर जानी पहचानी आवाज सुनाई दिया।
पर मैंने ध्यान नहीं दिया।अपने काम में लग गया। बोर्डिंग पास लिया ; और आगे बढ़ गया। एयर पोर्ट से नीचे उतरा तो एक साड़ी में लिपटी हुई महिला विल चेयर पर दिखी।उसे देखकर........ हे भगवान! कहकर आगे बढ़ गया।
उस महिला के चेहरे को नहीं देख पाया।देखने का कोशिश किया लेकिन देख नहीं पाया !
मैं होटल में रुका जैसे कंपनी ने मेरे लिए बुक किया था ।रात को वही ठहरने के बाद,.... मीटिंग के लिए गया।
मीटिंग शुरु नहीं हुआ था। वह पर एक कंपनी के बॉस का आने का इंतजार कर रहे थे। मै वाश रूम के लिए गया तब तक उस कंपनी को बॉस आ गई थी?
उसे वह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया लेकिन मैंने खुद को रोक लिया।मीटिंग अच्छे से गया।मेरी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट मिल गया।पेपर साइन करने के लिए,अगले महीने आने की बात बोले फिर चले गए!
रीना थी वो महिला जिसका इंतजार कर रहे थे सब,....सब चले गए! सौरभ आपके लिए काल आया है एक आदमी बोला, मै मजबूरन गया।पर ठन लिया था अपने सारे सवाल का जवाब लेकर रहूंगा ?
मै जल्दी से जाने और वापस आने का सोचा। सौरभ गया और जल्दी से वापस भी आ गया! इतना तोह पता चल गया थी की रीना ने शादी नहीं की है !गले में कोई मंगल सूत्र नहीं था और न मांग में सिंदूर था । एक लड़की रीना को विल चेयर पर बैठा रही थी।यह देखकर सौरभ हैरान रह गया।उसे कुछ समझ नहीं आया।उसे अपने दिल में दर्द महूसूस हुआ। सौरभ को खुद के सामने देखकर रीना चौक गई?
उसने अपनी सेकेट्री को रुकने का इशरा किया।
सेकेट्री रुक गई ? मैडम जी कोई समस्या। शीलू ने कहा,
नहीं कोई प्रॉब्लम नहीं है!एक मिनट रुको !रीना ने कहा,
"ओके मैडम" शीलू ने कहा,
सौरभ रीना के पैर के पास गिर पड़ा। सौरभ के आंख से आसू बह रहे थे। रीना के आंखो मे भी आसू आ गए ?
शीलू रुमाल दी। फिर शीलू बाहर चली गई ,उस रुमाल को रीना सौरभ को दे दी।
सौरभ रुमाल लिया और रीना के आसू पोछने लगा । तुमने मुझसे क्यो छिपाया ? सौरभ ने पूछा !
शीलू जा चुकी थी।........रीना उसी रुमाल से सौरभ को आंसू पोछि।
ये सब कैसे हुआ ! सौरभ ने पूछा,
शादी के दिन, तैयार होकर मां बाबू जी के साथ मैरिज हाल के लिए निकली थी लेकिन पहुंच नहीं पाई ? इतनी खुश थी कि बता नहीं सकती !
मां मेरी नजर उतरी और बाबू जी,..... कार को दरवाज़े पर लाकर खड़े कर दिए। मै मां और बाबू जी हम तीनो कार में बैठें!और कार चालू किया।
कार आगे जा रही थी। पिछे से एक ट्रक ने ठोकर मारी! मां बाबू जी को हल्की चोट आईं ; लेकिन मेरी पाव तले ही ज़मीन खिसक गया। आख् खुली तो डॉक्टर थे आस पास ,.... उठने का कोशिश की तो उठ नहीं पाई ?
डाक्टर ने बताया कि मेरे पैर के निचे की हिस्सा पै रा लियज हो गया है ,आप ठीक हो सकती है लेकिन वक्त लगेगा।
बाबू जी और मां ने कहा,... कि वो तुमसे बता दें। लेकीन मेने जी मना कर दिया ! मै तुम पर बोझ नहीं बनना चाहती थी।रीना ने कहा,....रीना तुमने ये क्या किया।क्या तुम्हे मेरे प्यार पर यकीन नहीं था।या अपने सौरभ को इतना कमजोर समझ ली। सौरभ ने कहा,..... नही सौरभ जी !रीना ने कहा, रीना मुझसे मेरे सारे हक छीन लिया। मुझे अपने दुख और दर्द में शामिल होने का मौका भी नहीं दिया! मैं पूरी जिन्दगी तुम्हारे साथ चलना चाहता था तुमने ओ भी छीन लिया तुमने ठीक नहीं किया एक बार कहकर तो देखती ! सौरभ ने आसू भरे आंख से कहा,
हनन...!रीना रोती हुई सौरभ से लिपट गई?
अब तुम्हारा कोई बहाना नहीं चलेगा। सौरभ ने कहा,
फिर सौरभ अपने निज पर बैठ गया!... सौरभ आप क्या कर रहे है ! "जस्ट मिनट " सौरभ ने कहा,और अपने जेब से एक अंगूठी निकलते हुए कहा,..."मिस रीना मिश्रा क्या तुम अपनी पूरी जिन्दगी मेरे साथ बिताना पसंद करोगी!" "विल यू मैरी मि "
रीना अपना हाथ आगे बढ़ा दी। सौरभ ने अंगूठी पहना दिया।और उसके हाथ को चूम लिया।
दोनों रो रहे थे लेकिन खुश भी थे। ख़ुशी के आसू थे या गम के आसू कुछ समझ नहीं आ रहा था। शीलू आगे बैठी दोनों को देख रही थी।जैसे ही दोनों होटल पहुंचे। शीलू बोली,...मैडम मै किसी से कुछ कहना चाहती हूं ? जा सकती हूं ? थोडी देर के लिए,.. हम्मम! जाओ तुम्हे एक हफ्ते को छुट्टी देती हूं ? रीना ने कहा,
मैडम आप नाराज मत होइए एक घंटे में वापस आ जाऊंगी ? शीलू ने कहा,
मै नाराज नहीं हूं ? अपनी ख़ुशी से छुट्टी दे रहीं हूं? तुम एक हफ्ते की छुट्टी एन्जॉय करो !रीना ने कहा,
"थैंक यू मैडम " शीलू ने कहा,फिर ओ चली गई ? सौरभ तुमने ये रिंग कहा से ,...रीना बोल ही रही थी कि सौरभ ने उसे चुप करा दिया।और कहा,...तुम्हारे जाने के बाद ये रिंग ही थी जो दिल के करीब थी।उस रिंग की शादी के बाद तुम्हे देना चाहता था।इस रिंग को आज मुंबई की इस भीड़ में खोने के लिए लाया था। इस रिंग को आज तक संभाल कर रखने की कोई वजह मिल नहीं रहा था।
लेकिन ये ईश्वर की कृपा ही थी कि मेरी दिल की पुकारा तुम तक पहुंच गई ?और तुम मिल गई ? सौरभ ने कहा ,
.... सौरभ जी !बहुत दुख दिया है मैंने आपको !रीना ने कहा, हम्मम...!बहुत तकलीफ़ हुआ था।प्यार से भरोश ही उठ गया था। किसी पर यक़ीन नहीं करना चाहता था।लेकिन ये दिल बार बार क्यों तुम और तुम्हारी यादों पर आकर रूक जाता था।तुम्हारे जाने की वजह जानना चाहता था। मै कितना गलत समझा तुम्हे सौरभ ने कहा,...मुझे माफ़ कर दीजिए ! रीना ने कहा,
अब मुझे कोई शिकायत नहीं है,
सौरभ और रीना उसी रात के दस बजे की फ्लाइट से दिल्ली चल दिए। एयरपोर्ट पर रीना और सौरभ के घर वाले दोनों का इंतजार कर रहे थे। रीना सब को साथ देखकर भौचक्की रह गई ? मैंने सब को सारा कुछ बता दिया । सौरभ ने कहा,
सौरभ की मां आगे आई और बोली,... बेटा! हम सब तुम्हारे बिना अधूरे हैं? हमारी बहु बनकर हमारे घर की गृह लक्ष्मी बन जाओ ! ... हम्मम..!बेटा , बड़े बाऊ जी बोले,मेरे और रीना के परिवार की वही एयरपोर्ट पर शादी की दिस्कस्शन शुरू हो गया। सब ने मिलकर तय किया कि हम दोनों की डेस्टिनेशन शादी होगी। हम दोनों को ऑर्डर दे दिया गया।हम दोनों शादी के मुहर्ट में टाइम से मण्डप में पहुंच जाएं
इस तरह हुई सौरभ और रीना की कहानी पूरी।
लक्ष्मणी खरे🖌️

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