दर्द सारे भुला दिए मेरे,
तेरी बेशुमार मोहब्बत ने,
गजब का असर है,
मेरे हमसफ़र की चाहत में ।
टुकड़े टुकड़े से मेरे दिल
क्यों सुकून माँगे,
जब जमाने की तसल्ली बख्स दी
मेरे खुदा ने मुझे इबादत में।
वो शामिल हैं मेरी रूह में,
न की किसी जिद की जुस्तजू में
उसको पाया है मैने हर आरजू में,
वो शामिल है मेरी हर राहत में
वो क्या है कैसे करूँ बयां,
वो उतरा है मुझमे लम्हां लम्हां,
जो जीते जी न छूटेगी कभी,
तू शामिल हैं मेरी जां नशीं आदत में।
सारिका शर्मा( अंजू)
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

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