हुई थी बातें कुछ मेरी तरफ से....
कुछ तेरी तरफ से.....
गलतियां भी थी
कुछ तेरी तरफ से....
कुछ मेरी तरफ से....
फिर सारा इल्जाम सिर्फ मुझ पर ही क्यों था सिर्फ तेरी तरफ से
वो हो गया जो कभी सोचा भी न था....
हो गई अब तो सदा के लिए दूरियाँ
कुछ तेरी तरफ से कुछ मेरी तरफ से...
बन गया अब तो फसाना कुछ तेरी तरफ से....
कुछ मेरी तरफ से....
मनमीत

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