दस्तक दे रही है।
सुबह के उजाले में
सूरज छुप रहा है।
बादलों की ओट में
लालिमा लिए बैठा है।
वह क्यों नन्ही
बूंदों मेंनहा रहा है ।
पुलकित है हर पत्ता
हर कोना हर डाली ।
छू रहा है आकर
आज उसे एक मतवाला।
हाथ लगाओ
नम कर देगा।
दूर से देखो
गुम कर देगा।
नन्हा है पर
होता जब इकट्ठा ।
बनता है आंख के
आँसु सा मोती।
दे रहा वह
धरती को ज्योति।
बारिश की बूंदों सा
छा रहा च हु ओर है ।
मेरा प्यारा एक
ओस का मोती।
मोतियों की
माला बनाते हैं ।
प्रकृति के उपहार के
गीत हम गाते हैं।
🌿☘️🌴🌳🌲🍀🎄
नन्हें नन्हें शब्दों की माला के साथ आज का विषय लिए आई है संध्या सुहानी तिमिर के साथ इंतजार अपने अपने मोतियों का 💦💦💦💦
संध्या पंवार

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