तबियत मायूस सी
रहने लगी है अब
जब से जाना है हमने
उम्र जिंदगी की ढलने लगी है
मायूसी उम्रदराज होने का नहीं है
कसक इस बात की है
जिये तो बहुत लेकिन
जिंदगी को महसूस किया नहीं है
सभी की सोंचते रहे तमाम उम्र मगर
खुद को वक्त हमने दिया नहीं है
खैर,कम ही सही पर अभी भी
कुछ वक्त तो बाकी है उम्र की अभी
सोंचते हैं अब तो तसल्ली से इसे
जी भर के जिया जाए
जिंदगी बाकी है वक्त के गिलास में अभी
जिंदगी को घूँट घूँट पिया जाए

               अन्नपूर्णा मिश्रा
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