पहला सुख जिसे कहते हैं
मैंने पाई निरोगी काया
इसलिये तुम मेरा मोल न समझे
ये कैसी ईश्वर की माया
आज तुम बीमार हुए
इक दिन आएगा मेरा
जब मैं बीमार होउंगी और
तुम करोगे मेरी सेवा
कितनी चिढ़ चिढ़ करते हो
और नखरे भी कई दिखाते हो
जब तबियत कभी बिगड़ती तो
बिल्कुल बच्चे बन जाते हो
सारा दिन फिकर होती तुम्हारी
मान मनुहार भी करती हूं
तुम सताते तो आंसू आते पर
तुम्हें प्यार बहुत मैं करती हूं
जल्दी तबियत ठीक करो अब
मन कही लगता नही मेरा
तुमको छेड़े बिना पतिदेव
पेट नही भरता है मेरा
पर देखना जब एक दिन
मै बीमार हो जाऊंगी
फिर तुम भी मुझे मनाते रहना
और मै तुम्हे सताउंगी
–प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

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