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    कल की बात है,जब एक कली गोद में
    खिली थी,जो आज फूल सी हो गई,

    नाज़ुक नाज़ुक थी जो कल तक,आज    
      मजबूत देखो तो कितनी हो गई।
 बेटी थी जो कल तक मेरी,आज मां जैसी हो गई 

      कितना कुछ समझाती है,इस मां को कभी  
      कभी दुनियादारी भी सिखाती है।
      है छोटी पर सियानी सी लगती है,
    सच कहूं कभी कभी तो उसमें मुझे उसकी     
        नानी सी दिखती है।
      
      बेशक घर के कामों में हाथ कम बटाती है,   पर जब मैं झल्ला जाती हूं,तो"मम्मी छोड़ो न ये    सब,थोड़ा सो जाओ, कह कर मुझको खूब         
            बहलाती है।

     दिन भर धमाचौकड़ी , गपशप,शॉपिंग,कर के
      मुझे खूब दिखाती है,कपड़े हैं ढेरो उस पर,
      पर हर बार निगाह अपनी मेरे कपड़ो पर ही 
              लगाती है।

      मै जानती हूं कि मेरा सब उसका है,फिर भी
      ये कह कर ये मत लेना,उसको खिजाती हूं,      फिर उसका"कैसी मां हो तुम"सुनकर मै भी
            खूब मुस्काराती हूं।

        बेटी,अब बेटी नहीं सहेली सी हो गई, रातों
     को उठकर साथ मै गपशप करने वाली एक
              हमराज सी हो गई।
   उदास चेहरा देख मेरा,पल भर में घबरा जाती  
  है,  दिखाओ चेहरा अपना,बताओ ना, क्यों रोए 
  जा  रही हो,क्या पापा ने कुछ कहा,बोलो, फिर 
    पापा को आवाज लगाती है।

     कितनी बड़ी हो गई,मेरी बेटी,
  अब सच में सियानी सी हो गई मेरी बेटी।

                       अर्चना आर्ची
                         लखनऊ