आज अपनी बालकनी में खड़े खड़े रीवा को पता नहीं क्यों उस दिन की याद आ गई जिस दिन उसने पहली और आखरी बार उस अजनबी को देखा था उन दोनों की वह मुलाकात कुछ ही पलों की थी लेकिन रीवा को वह सब आज भी इतनी अच्छी तरह से याद है जैसे कि यह सब कुछ कल ही हुआ हो।।। बात यही कुछ 10 साल पुरानी होगी।।।
शाम के 6:00 बजे का वक्त था रीवा अपनी दो सहेलियों शालू और मधु के साथ कोचिंग क्लासेज से वापस आ रही थी वह रोज ही कोचिंग क्लासेस से पैदल ही वापस आती थी कोचिंग क्लासेज उसके घर से यही कुछ 25 मिनट की दूरी पर था।।।
उसकी दोनों सहेलियां आधे रस्ते तक ही उसके साथ वापस आती थी फिर बीच से ही वह दोनों अपने घर के लिए मुड़ जाती थी और वहां से रीवा अकेले ही अपने घर आती थी कभी-कभी उसके भैया या पापा बाइक से उसे लेने भी चले जाते थे लेकिन ज्यादातर वह पैदल और अकेले ही कोचिंग से घर वापस आती थी।।।।
उस दिन जब उसकी सहेलियां अपने घर की तरफ मुड़ गई तो रीवा उन दोनों की तरफ घूम कर देते हुए उन्हें हाथ हिलाकर रोज की तरह ही बाय बोल रही थी पीछे की तरफ देखते हुए आगे बढ़ रही थी तभी अचानक वह एक लड़के से टकरा गई....
उस लड़के से टकराने के बाद ही उसका ध्यान आगे की तरफ हुआ उसने अपने हाथों में जो किताबें पकड़ रखी थी वो उस अजनबी लड़के से टकराने की वजह से जमीन पर गिर पड़ी।।।
और उस लड़के के हाथ का कुछ सामान भी जमीन पर गिर गया रीवा ने जैसे ही उस लड़के की तरफ देखा वह उसे देखती ही रह गई साधारण सा दिखने वाला मगर आकर्षक व्यक्तित्व का वह लड़का लगभग उसी की उम्र का होगा उसने उससे कहा ओ सॉरी मेरा ध्यान कहीं और था।।।।
उस लड़के ने उसके जवाब में कहा इट्स ओके कोई बात नहीं।।।
रीवा को लगा वो लड़का बहुत ही रूड है उसे लगा था कि उसके जवाब में वह भी सॉरी बोलेगा लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया।।।
यहां सब रीवा को थोड़ा अजीब लगा लेकिन पता नहीं क्यों वह लड़का उसे कुछ अपना सा लग रहा था लेकिन उसने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और जल्दी-जल्दी में उसने अपनी किताबें जमीन से उठाई और समेट कर अपने घर की तरफ चल दी।।।
तभी उस लड़के ने उसे पीछे से आवाज लगाई हेलो मिस 1 मिनट सुनिए।।। रीवा ने उसकी आवाज पर ध्यान नहीं दिया और तेज कदमों से अपने घर की तरफ चलने लगी।।। उसे लगा वह भी बाकी लड़कों की तरह कोई बहाना बनाकर उससे बात करना चाहता है।।। रीवा को ऐसे लड़के बिल्कुल भी पसंद नहीं थे।।।
वह लड़का उसे आवाज लगाते हुए उसके पीछे आने लगा रीवा को थोड़ा डर लगने लगा था तभी अचानक वो रुक गई और वह लड़का उसके सामने आकर खड़ा हो गया उसने उससे बोला सुनाई नहीं देता क्या आपको इतनी देर से आवाज लगा रहा हूं ,,,,
रीवा ने बेरूखी से कहा - हां तो क्यों आवाज लगा रहे हो.....
उस अजनबी लड़के ने कहा- अरे यह बात है कि आपकी किताब मेरे सामान में रह गई थी मेरी नहीं है और आप शायद गलती से मेरी बुक ले आई हैं।।। इसीलिए आवाज लगा रहा था आपको....
रीवा ने जब ध्यान से उस किताब को देखा तो उसने कहा अरे हां यह तो मेरी ही किताब है सॉरी जल्दी बाजी में मैंने ध्यान नहीं दिया और अपने हाथ में देखा तो वह उस लड़के की किताब थी उसने अपनी किताब उस से ले ली और उसकी किताब उसे वापस करते हुए बोली।।। थैंक्स....
लड़के ने फिर से उसी बेरुखी में जवाब दिया इट्स ओके और अपनी किताब लेकर चलने लगा।।।।
तभी रीवा ने उससे कहा- तुम्हारा नाम...... और इतना कहते ही वो चुप हो गई।।।।
वह लड़का रुका उसने मुस्कुरा कर पीछे मुड़कर रीवा को देखा और बोला- अभिनव......
और इतना कहकर वहां रीवा के घर की विपरीत दिशा में चला गया और रीवा वहीं खड़ी उसे जाते हुए देखती रही जब तक हो उसकी आंखों से ओझल ना हो गया।।।।
उसके बाद वह वापस अपने घर आ गई उसने यह बात आज तक किसी से नहीं बताई शायद बताने जैसा कुछ था भी नहीं इस बात में बस यही सोच कर उसने नहीं बताया किसी से.....और उस दिन के बाद अभिनव भी उसे कभी कहीं दिखाई नहीं दिया उसके घर और कोचिंग के रास्ते में आते जाते वक्त वह हमेशा किसी को जैसे ढूंढती रहती थी लेकिन उसे वह दोबारा कभी भी नहीं दिखा।।।।
लेकिन आज इतने वर्षों बाद भी रीवा को यह बात आज भी याद है और वह अजनबी लड़का भी...... वह खुद भी कभी नहीं जान पाई की क्यों वहां यह बात कभी भूल नहीं पाती....
समाप्त।।।
सिमरन......

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