देखे जब किसी को,बहाने बनाकर
सरोवर की पानी,आँखों में सजाकर
क्या ये गम की आँसू,या
खुशियों की झलक थी
पलक की पंखुरियों को नम भर उठाकर


जब बरसती अंगारे,धू-धू करके जलते
गरजती नही,तरकती ये बिजली
सीखाती है प्यार की कहानी गजब की
सलाखों के पिछे सुरक्षा अज़ब की


नरम सी है पंखें पलकों को सजाकर
चौकन्नी सी रहती ये पलकें उठाकर
गम की आहट को सुनकर
नहीं देर करती कभी भी
बरसती है फिर बादलों की जैसी


न रुकती कभी आँसूओं के ये बूँदें
टपकती है जब तक 
मिल न जाये कोई सहारा
तमन्ना भी इसकी रहती 
मुझे मिले प्यार सारा



    लेखक:- विकास कुमार लाभ
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