तेरे मेरे बीच में है दरमियां 
क्यों बढ़ने लगी ये दूरियां ।

फासले जो दिलों के बढ़ने लगे 
हम तुमसे मिलने को तरसने लगे ।

मेरी आंखों में बसे थे तुम हो जानम 
दिल में रहते थे तुम जान बन कर ओ सनम ।

किसलिए तुम खफा हो गए मेरे हमदम 
ना भुला पा रहा हूं वो पल वो हर पल ।

तुझे दूं इन टूटे हुए दिल का पैगाम 
बेसबरा तुझे ढूंढे सुबहो,सुबहो शाम ।

लबो की खामोशी इजहार कर ना सकी 
मैं बेवफा नहीं तुम क्यों वफा कर ना सकी ।

हूं तेरे मेरे बीच में है दरमियां 
हां क्यों बढ़ने लगी ये दूरियां ।

ये दूरियां ....ये दूरियां....... ये दूरियां........
                
                                राजेश्वरी ठाकुर   
                          दल्ली राजहरा,छत्तीसगढ