सुनहरा अवसर है आज,
देश भक्ति में डूबा भारत आज,
सुन्दर सारगर्भित समर्पित गीत,
वर्षो से अनवरत चलती रीत,
ऊँ देश के नौजवानों को सलामी,
जो देश में थी सदियों से गुलामी,
नवभारत क संकल्पना से युक्त,
सृजन, संवेदना और प्रेरणा से ओतप्रोत,
इस स्वर्णिम वसुंधरा का सदैव श्रेय है,
श्रुति रखती देश से सदा स्नेह,
जीवंत महापुरुषों की जन्म भूमि,
महा योद्धाओं की यह समर भूमि,
शिक्षा और ज्ञान की बहती है गंगा,
नाम कर रही नव पीढ़ी रोशन तिरंगा,
नारी भी शिक्षित होकर कर रही अलंकृत,
धरती माँ के शीश को कर रही सुशोभित,
अपने देश के धूलि को मस्तक पर रखते,
सदा विकसित राष्ट्र की संकल्पना करते,
सभी साक्षर हो समृद्ध हो आगे बढे,
देश की उन्नति में हो आगे खड़े,
बन कर हृदये से धरती माँ के सुपुत्र,
रौशनी से भर दे धरती माँ को सर्वत्र,
हृदय से शत-शत नमन हमारा,
भारत देश है सबको प्यारा,
सबसे प्यारा सबसे न्यारा,
सबसे प्यारा देश हमारा,
जहाँ है कई रीति रिवाज़ संस्कृति,
कई धर्म, भाषा, वेद की अभिव्यक्ति,
सामान है देशभक्ति की अनुभूति,
सहजानुभूति, समानानुभूति, सृजनशक्ति,
सब संकल्पित होकर चिर ज्योति जलाये,
अपनी भारतीय संस्कृति और देश के गीत गाए,
डॉ सुरभि जैन "श्रुति"
सतना

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