तेरी तरह क्या कोई मुझे चाह पाएगा,
जान तो सब कह देंगे क्या सच मे जान बना पाएगा।
जो प्यार करते हो तुम निस्वार्थ भाव से कोई भी,
प्यार करेगा पर वो भाव न ला पाएगा।
तेरी नजरों में जो कद्र है मेरी वो कोई न कर पाएगा,
चाहकर भी तेरे जैसा मान न दे पाएगा।
पलक भिगाने को हैं तैयार सब यहाँ,
पर तेरी तरह दिल को कोई न समझा पाएगा।
मेरा प्यार तो तू ही है सनम मेरे,
कहीं भी ढूढ लूं जमाने में पर तेरे जैसा न कोई मुझे चाहेंगा।
यह सब तो है फरेब के लम्हें न आना इनमें,
हर शख्स होगा कुछ और कुछ जताएगा।
भर आती हैं पलके मेरी तेरी पाक मुहबतों पर सनम,
तेरी तरह कहाँ कोई मेरे नाज उठाएगा।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

1 टिप्पणियाँ