जीवन की उलझी राहों को ,
हो सके तो सुलझा देना,
मुझे दिशा मिल जाएगी,
बस मेरा साथ ,निभा देना ।

चाहे तुम दूर कहीं भी हो,
एहसास तुम्हारा काफी है,
राहों के कांटे मिट जाएंगे,
ऐसा विश्वास दिला देना ,
मुझे दिशा मिल जाएगी,
तुम मेरा साथ निभा देना।

चाहे खुशी की महफ़िल हो,
या छाए गम के साय हों,
तुम करीब चले आना,
चाहे राहों में बाधाएं हो,
इन पथरीली राहों में,
तुम साथ कदम बढ़ा देना ,
मुझे दिशा मिल जाएगी
तुम मेरा साथ निभा देना।

इन निर्मोही आयामों में ,
जज़्बात सभी के सस्ते है
सूने मन के आगन में,
हालातों के बस्ते हैं,
यह नीरसता मिट जाएगी,
तुम इक आवाज लगा देना,
मुझे दिशा मिल जाएगी,
तुम मेरा साथ निभा देना।
    
           कीर्ति चौरसिया
              जबलपुर (म .प्र.)