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मां बाप के दिल की जान था वो,
गर्व करते थे उस पर अभिमान था वो,

मांगा था जिसे रात- दिन दुआओं में,
तब आया था वो, मां बाप की पनाहों में,

पाला था बड़े प्यार से पलकों पर  बिठा के,
कांटा जो चुभा तुझको तो, घर सिर पे उठा के,

कोई कसर न छोड़ी तेरे लाड प्यार में,
  बड़ा होकर जब तू ,पढ़ने चला गया---
  दिन रात काटी थी तेरे इंतजार में,

क्या खबर थी उनको कि तू भटक गया,
गलत संगत में ही तेरा मन अटक गया,

सोचा ना था तू इक दिन, दरिंदा बनेगा,
लूटेगा  किसी की इज्जत, तार -तार करेगा,

अब कोसती है  माँ, उस दिन को आज भी---
ना मांगती दुआ में तो बच जाति लाज भी,


मांगा था दुआओं से तुझे, मेरा खून था,
बुढ़ापे की लाठी थी, मेरा गुरूर था,


टूटा सारा गुरुर, तू मेरी भूल था,
पूजा का फूल समझी थी,
लेकिन तू जहरीला शूल था।
                                    
                                   संगीता वर्मा ✍✍
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