कलम मेरी प्रेरणा , मेरी सखी सहेली,
समाधान करती हो चाहे कोई पहेली
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ना रूठती, ना रूकती ,सरपट चलती
जज्बातो को मेरे ,कागज पर ले आती
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कभी ना डरती, बस बेबाकी के भाव रखती
गीत कभी मुक्तक से मन की व्यथा बताती
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जब जब बेचैन रहती हूँ, पूछ लेती ये हाल
कभी कहानी ,ओर किस्से लिखती सालो साल
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ना स्वार्थ ना अभिमान, नम्रता का परिधान
लेखन चलता , ज्यों चलता विधि का विधान
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एक एक स्वर सुरभित होता जैसे कलम चलती
कलम से ही अस्तित्व शब्दों का ,भाव ये बनाती
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कलम ही मेरी सखी सहेली ,हृदय को ये भाती
समाज के हर रंग का ये दर्पण हमें दिखलाती
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पल भर में इतिहास ये लिख दे,वर्तमान समझाती
हथियारों में अचूक शस्त्र है, भान सभी को कराती
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तलवारों सा वार भी करती ,बिना घाव लगायें
शत्रु को भी पस्त करदे, विरूद्ध जो लिख जाये
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कृष्णा की✍️ कलम से

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