आपके सुआगमन से,
मन मुदित हृदय प्रफुल्लित है।
सौभाग्य हमारे अतिथि पधारे,
सभा हमारा हर्षित है।
कृतज्ञ हुआ मंच हमारा,
जन -जन करते अभिनंदन।
अर्पण सौरभ सुमन का,
है विप्र हमारे प्रिय रघुनंदन।
प्रज्वलित दीपों की माला,
मंगल गान हम करते हैं।
उछाह भरा उर अन्तर में,
नित स्वागत हम करते हैं।
नित स्वागत हम करते हैं।
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सतेश देव पाण्डेय

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