कितना कुछ कह देती हैं,
ये चंद बातें तुम्हारी ।

एहसास कराती हैं कि मैं हूँ
कहीं वजूद है मेरा....

तुम्हारी बातें....
कितनी सीधी हैं....
फिर भी गहरी हैं....

कौन एहसास कराता है मुझे इतना
आज की फरेबी दुनियाँ 
और
उनकी दोहरी बातों से अलग कराती हैं मुझे
तुम्हारी ये चंद बातें......

क्या कहूँ.....
मुझे मेरे होने का एहसास दिलाती हैं
तुम्हारी ये चंद बातें......

वो.....वो तेरी बातों में सबका होना
और
उनसे अलग मेरे और तुम्हारे होने का
अर्थ बताती हैं ये तुम्हारी बातें.....

मुझमे मेरा होना
और
तुम में मेरा होने के अंतर का
एहसास दिलाती हैं तुम्हारी बातें...

क्या कहूँ....
क्या बताती हैं तुम्हारी ये चंद बातें
मैं हूँ इसका अर्थ बताती हैं
तुम्हारी ये चंद बातें........

मुकेश दूहन
सोनीपत हरियाणा