जब उगलते है
शब्द मेरे
आग के गोले ,
स्याही से नही ये
कोयले की लालिमा से
दमकते है ।
मै नही डरती खौफ से ,
अपनी ताकत से
हर खौफ को डराती हूँ ।
मेरे हौसलों की
बात ही न पूँछो
शब्दो मे भी तलवार
चला देती हूँ
डरती नही कभी मै
दुनियाँ को डरा देती हूँ
वीरागंना की भूमि की
मिट्टी को महका देती
खौफनाक मंजर को
चुटकी मे भगा देती
शोला सी ,दामिनी सी जब
डर को मै हरा देती ।
खुद को वीरांगना बना लेती ।
मीनाक्षी शर्मा

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