जब आंखें खुलते ही दिखता हैं
ममता को बालक का प्यारा स्पंदन,
तो होता हैं बसंत।।
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तुम ही मेरे आदि
तुम्हारे बाद हर अंत
तुम हँसे तो सावन
रूठे तो पतझड़न्त
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प्यारी खिलखिलाहट से ही
ममता का नित बसन्त🍁
जब प्रेम भरे भोजन से
भूखे को आता हैं आनंद,
तो होता हैं बसंत।।
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जब मनुहारों मांगी जिद
पूरी करने की होती मीठी अनबन,
तो होता हैं बसंत।।
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सफलता की चाह में
लड़खडाते हाथों से मिलता
जब आशीष पावन,
तो होता हैं बसंत।।
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यौवन की धारा में
मनमीत मिले और गाये ये मन
तो होता हैं बसंत।।
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लेखन के गागर में
मिल जाय गर
साहित्यिक मंच,
तो हित हैं बसंत।।
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जीवन मे लिप्सा मिट
हो बस तोषी केवल मन,
तो होता हैं बसंत।।
🌸भारती प्रवीण....💕✍🌸

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