शब्द शब्द में है सार
शब्द शब्द पर मैं निसार
शब्द में छिपा आशीष
शब्द से बंया होता प्यार।
       शब्द से गीत गजल बने
        शब्द से जागे सारे साज
        उतर दिल की गहराई में
        खोल देते दिल के राज।
                 ये शब्द बड़े निराले हैं
                  प्रेम प्रीत के प्याले है
                 जज्बात रखते सीने में
                  होते जो दिलवाले हैं
शब्द प्यारे परिवार के
रक्षक बन मंडराते हैं
संस्कार और संस्कृति
शब्द ही तो बताते हैं
        शब्द पंखों की उड़ान
        शब्दो से चुम ले आसमान
         शब्दो मे मां की ममता
         शब्दो मे पिता के अरमान।।
शब्दो का करे सम्मान
जीवन पथ बने आसान
आदर शब्द वादन करे
शब्दो मे ही मान अपमान।।

श्यामा सोलंकी