समझौता अपनो से करले
युग बीत जाना है
दो घड़ी साथ मे रहले  
अरे कुछ उनकी सुनले
दर्द कम हो जाना है रे 
साथ नही तू दे पाएगा 
जीवन मे फिर तू ना आएगा
इस जीवन मे बैठ के प्राणी
हाल दिलो के सुनले 
समझौता अपनो से करले
गेरो के संग हंसकर रहता 
भेद न मनके उनको कहता
अपने दर्द को तू भी   सहले
या अपनो से कहले 
समझौता अपनो से करले
समय के संग में बह ले
तू भी कुछ उनको कह ले
लगी जो अग्नि दिल मे 
उसे तू आज ही धोले 
दिलो के राज जो खोले 
प्रेम के इस संसार मे प्राणी 
तू अंधा हो  बह ले





             संध्या पंवार