नहीं आया मुझे बातें बताना
दुबारा प्यार में रातें गंवाना
ना जाने क्या हुआ कैसे हुआ ये
कहां छुटा मेरा साथी पूराना
खतो में आज भी जिंदा रखा है
किसी के याद का गुज़रा ज़माना
सलीका आज भी आया नहीं कुछ
नहीं आया मुझे यादें मिटाना
कभी टूटा कभी बिखरा सितारा
नहीं है ख्वाब का कोई ठिकाना
हमेशा दूर से अच्छा लगा है
बजे जो ढोल पर गाना सुहाना
कहे लाखों दफा कोई दिवाना
नहीं आता कभी गुज़रा ज़माना
पूनम लोहार
उदयपुर राजस्थान

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वंदना शर्मा