कितनी शान से वो मोहब्बतों से ज्यादा अहमियत दोस्ती की
  बता जाते हैं ।
अफसोश जिन्होने न कभी दोस्ती को निभाया न मोहब्बतों को समझा,
वो क्या क्या  ज्ञान लुटा जाते हैं।

जब कभी गुजरते हैं अल्फाज उनके नजरों से  ,
कसम से पलक  डबडबा जाते हैं।

कुछ इस तरह से उठा है जनाजा भरोसे का,
 अब तो कहीं दोस्ती का ज़िक्र हो अंजुम तो घबरा जाते हैं ।
अफसोश कुछ लोग आते तो हैं दिल में एतराम के साथ ,
पर जाते जाते किसी पर न हो यकीं ऐसा सबक सिखा जाते हैं।

बहुत शर्मिंदगी सी होती है अपनी वेअकली पर क्यों मासूम दिल 
इन हुनरबाज लोगों के फरेब में आ जाते हैं।





                  अंजू दीक्षित
                बदायूं उत्तर प्रदेश