जिसकी पूरे चाँद-सी,
रूप की ज्योति होती है
प्रेम में,अनुराग में, समर्पित होती है
सुंदर ही नही वो, सुंदरतम होती है
जब कोई लड़की दुल्हन होती है।

सांवली हो चाहे, पर नयनों में स्वप्न बसाए
वो लुभावनी, स्वयं कृष्ण की राधा होती है
सुंदर ही नही वो, सुंदरतम होती है
जब कोई लड़की दुल्हन होतीहै।

साधारण से चाहे, नैन नक्श हों उसके
फिर भी वो लडक़ी अति मनभावन होती है
सुंदर ही नही वो, सुंदरतम होती है
जब कोई लड़की दुल्हन होती है।

यदि अप्सराओं जैसा, लावण्य हो उसने पाया
तो मानो वह लड़की, रति की उपमा होती है
सुंदर ही नहीं वो, सुंदरतम होती है
जब कोई लड़की दुल्हन होती है

सोलह श्रंगारों से सुशोभित,ओढ़े लाज की चुनरिया
नव जीवन मे पग रख,संस्कारों का दर्पण होती है
सुंदर ही नही वो, सुंदरतम होती है
जब कोई लड़की दुल्हन होतीहै

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                    –प्रीति ताम्रकार
                       जबलपुर