मुझे दुल्हन सा तुम सजा देना
न करना गलती सोलह श्रंगार मे
तुम रच रच कर कर देना मेरा ।
मुझे पता है मै टोकती बहुत हूँ
मगर सौगंध खाती हूँ तुमसे मै
नही बोलूगी तनिक भी जुवां से मै
मै वादा अपना निभाऊँगी तुमसे ।
जरा मेंहदी सुन्दर सी रचाना तुम
मै रचते समय जरा भी न हिलूगी
न बिगडे मेहँदी मेरे हाँथो की बस
मै मौन बनकर रचवाती रहूँगी सच
जरा मैचिंग का ध्यान रखना तुम
चूडी साडी के रंग की पहनाना तुम
मेरा रंग बही हो जो तुम्हे भाता बहुत है
लाल रंग की बडी सी बिंदी लगाना तुम ।
मै जब करती सोलह श्रंगार दुल्हन सा
तभी धीरे से मुस्कराते नजर आते हो तुम
मै भी देखना चाँहू कैसे मुस्कराते हो तुम
बडा शौक है मुझको दुल्हन सा सजा दो तुम ।
मीनाक्षी शर्मा

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