थी पानी सी बेरंग जिंदगी
बह रही थी अकेली चुपचाप सी 
अंधेरे कोने में तन्हा तन्हा
रोज होती थी मुलाकात
मगर सामने होती थी खुद की परछाई उदास सी
ठहरा हुआ था आसमां
बुझे बुझे से थे दिल के अरमां
जी रहे थे बस
एक मोहब्बत के दिए की आश में
कभी सोचा ना था दिल के कोरे कागज पर
प्यार के सतरंगी फूल खिल जाएंगे
बस यूं ही चलते चलते
आह भरते भरते
जिंदगी की राह में
मुलाकात हुई रहबर से 
नज़रों से दिल का दीप जगमगा उठा
प्रेम का रंग चढ़ने लगा
बेरंग जिंदगी सतरंगी इन्द्रधनुष सी रंगीन हुई
मोहब्बत ने कहा - क्यों रोता है पगले? मैं हूं ना
कोलाहल हुआ मधुर संगीत का
दिल के तार बजने लगे
खोये अरमां सजने लगे
आंखों से खुशी के झरने बहने लगे
बेजान दिल के परिंदे सतरंगी सपनों में उड़ने लगे।

अहसास हुआ मोहब्बत के बिना अधूरे थे हम।
हां मिलकर महबूब से चांद भी पूरा है पूरे हैं हम।।
अब ना ख्वाइश है जमाने के किसी रंग की हमें
प्यार के सतरंगी इन्द्रधनुष से हर पल हर क्षण घिरें है हम।‌।

       पिंटू कुमावत किरण 🙏🙏 💐💐