आ ले चालू तुझे तारों के शहर में
धरती पे दुनियां हमें प्यार ना करने देगी......
तारे आसमां पे साजे रहे
मेरी आँखो मे सपना बनकर बसें रहे
निहारा करती थी रोज़ रात को
टूटे कोई तारा बने फिर कुछ बात
माँगू फिर मे कोई इससे सौगात
खुद मिट के भी सब को मुस्कान दे जाता है
मुरादें पूरी हो या ना हो सब के अरमान जागा जाता है
टूटे तारे ने इतने गम समेटे हुए है
नजाने कोई भी जग मे ये संसार
जुदा होकर आसमान से वो भी तो कितना रोता होगा
छूटा साथ उम्र भर का वो भी कितना सिसकता होगा
दुनियां जाते जाते भी किसी के ख्वाबो का वो गवाह बन जाता है
मिटा के अपनी हस्ती को दिलो को रोशन कर जाता है
आलिया खान

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