क्या कहा... "देशभक्ति",
ये कुछ सुना सुना सा लगता है।
कहते हैं कि एक साल में,
ये बस दो ही बार जगता है।
वीरों का इतिहास तब,
समाचारों में छपवाते हैं।
कुछ विशेष झांकियां,
तब टी वी पर दिखलाते हैं।
बुलाते हैं नेताओं को,
सारा शहर बंद करवाते हैं।
छोटे छोटे बच्चों से,
भूखे पेट परेड करवाते हैं।
ठंड, बरसात, धूप,
वो सब सहते जाते हैं।
नन्हा मुन्ना राही पर,
वो मस्त झूमते जाते हैं।
लोग भी उस दिन को,
बस अवकाश दिवस मनाते हैं।
भेजते हैं संदेश सब को,
और फिर सभी सो जाते हैं।
मेरे प्यारे देशवासी,
कुछ ऐसे देशभक्ति दिखाते हैं।
*© वरदान जिन्दल "सुगत"*

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