जिंदगी चाहते हो जीना
तो सीख,
हर हाल में खुश रहना
अपनो ने जो गम दिए
हँस कर उनको पीले
समझौता करले....
जब जोश था
तब होश नही था
होश आया
था अकेला
यही है ज़िंदगी का मेला
इस मेले में खो न जाना
संम्भल जा अभी भी
बचा कुछ जोश हैं
उसे भी आजमाले
समझौता करले....
अपनो के धोखे
दिल मे घर कर जाते हैं
दिल वाले उन्हें
माफ कर जाते हैं
दूरियां ज्यादा
दिलो की दूरियां बढ़ाती हैं
दो बातें प्यार की कर
फासले कम करले
समझौता करले....
मौसम बदला
दिन बदले
बदल गई सब राते
लोग बदल गए
बदल गई सब बातें
तुम भी बदलो
छोड़ो सारे उसूल
प्यार की भाषा बोलो
यही है जमाने का दस्तूर
वरना सब कुछ फिसल जाएगा
कुछ नही रहेगा पल्ले
समझौता करले....
दिल जो मांगता है
वही देना सीख
प्रीत की दे भीख
जीना सीख
थोड़ा कुछ
अपने को भी बदल लें
समझौता करले,......
श्यामा सोलंकी
निम्बाहेड़ा

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