सपना मेने एक देखा है, भूमंडल पर तारो का।
नव सृजन के इस पटल पर,
नये नये कलाकारों का।
  नित्य की रचना करना, मानव केअधिकारों का।
 काव्यका करते हैं नया, सर्जन, देशकेकलमकारो का।
 देश धरा  पर मिटने वालों,  धर्म के रक्षक वालों का।
 धर्म के रक्षक वालों का,
उन नित नए झंकारों का।
देख रही हु में एक सपना,
काव्य मंच के तारो का।
कोई वीर,श्रृंगार हास्य 
रौद्र रूप अवतारों का।



संध्या पंवार