साथ दो तो,हाथ थामो
टुट चुकी, फिर बांधो
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राह दुर्गम, ठोकरों से
घायल नहीं, होसलो से।
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हूँ अकिंचन, शुन्य जीवन
आज आकर ,दो संजीवन ।
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जो नहीं है, भाग्य में वह
काज से ही,प्राप्त है सब
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झांक कर जब ,देख लोगे
दुख सारे ,जान लोगे
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सुख सारे,साथ ना हो
पास मेरे, साधना हो
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शुन्य जीवन ,ना रहेगा
ईश का जब ,साथ होगा
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कृष्णा की✍️ कलम से 🙏🙏

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