एक ही धागे के दो मोती है हम तुम
एक है दिल और दूजा उसकी धड़कन

घर के हर कोने में एहसास तुम्हारा बसता है
नाम तुम्हारा ही अब हर साँस में मेरी चलता है
सुबह की चाय ओर भी मीठी लगती अब
जब पहली चाय से ही दिन दोनो का चलता है

सुबह की पूजा शाम की पूजा अब  नाम से तेरे होती
छोटे बड़े हर दुख में मैं आगे तेरे होती
आंच ना आये तुम पर कोई बस इतना मैं चाहूँ
तेरी हर खुशियों को छीन के रब से लाऊं

चूड़ी, कंगन, बिंदिया सब तेरे नाम के लगते हैं
छोड़ के सारी दुनिया बस तेरे लिए  ही सजते हैं
छोड़ के मुझको जब तुम काम पे अपने जाते हो
नही जानते तुम तब जान मेरी ले जाते हो

वो गीला तौलिया सोफे से हर रोज  उठाने आती हूँ
तब मन ही मन मे हँसके आलसी तुम्हे बुलाती हूँ
मैले कपड़ों से भी खुशबू तुम्हारी आती है
पास तुम्हारे होने का एहसास कराके जाती है

घर की हर सब्जी में स्वाद तुम्हारा डलता है
तेरी पसन्द का ही अब दाल में तड़का लगता है
जब शाम का सूरज ढलता तब धड़कन बढ़ जाती
थोड़ा सजलूँ संवर लूँ, जान मेरी घर आती

एक ही थाली में अब रात का खाना लगता
एक निवाला हाथ से तेरे खाके मन अब भरता है
साथ बैठ कर तेरे थकान मेरी मिट जाती
आँखों मे भरकर तुझको मेरा हर दिन ढलता है!

एक ही धागे के दो मोती है हम तुम!
एक है दिल और दूजा उसकी धड़कन!


                कोमल भलेश्वर
           यमुना नगर,हरियाणा