मुट्ठी से फिसलती रेतो सी "
तकदीर है चन्द लकीरो सी।
ऐ रेत के टीले मौत बने।
सैनिक की किसी कहानी सी ।।
मुल्क की रक्षा की ख़ातिर।
वो प्राण निछावर कर डाले।।
रेत सी तपती भूमि को "।
आजाद फरिश्ते कर डाले।।
जो भरा नही है भावो से ।जिसमे
बहती रसधार नहीं।
वो ह्रदय नही वो पत्थर है।
जिसमे वतन का प्यार नही।।
वो उडती रेत के टीले मे ।
जो सैनिक मेरे शहीद हुए।।
नतमस्तक हो उनकी खतिर।
वो उस भट्ठी मे दफ्न हुए।।
उन को शत शत प्रणाम मेरा।
धरती माँ को चूम गए।
प्राण निछावर कर अपना।
अपनी जननी को भूल गए।।
ऐसे सपूत जिस जँमी पर हो।
कोई कुछ न कर पाऐगा।।
रेत के टीले ढह जाऐगे।
नाम अमर हो जाऐगा।।
जय हिंद
🙏🏼रीमा महेन्द्र ठाकुर 🙏

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