सितारे आए शाम आई।
चांद आया तुम्हारी याद आई ।
आंखे झर पड़ी कोहरे की तरह।
रात भर हाय तुम्हारी याद आई ।
चांदनी रात ये समंदर का शोर।
फेन उमड़ा..... लहर पगलाई।
रेत में हमने घरौंदें .. बनाकर।
तुम्हें पुकारा तो बरसात आई।
रात भर हाय...........
जंगली हवा में बहारों के फूल
महक उठी ......गढ़ी अमराई।
रची फिजा में शहद की खुशबू।
फिर भी नहीं तुम.. नहीं तुम आई।
रात भर हाय...........
ये कुमुदनी ये चांदनी ये चकोर ।
जंगलों में फिर से नाच उठे मोर।
स्वाति की बूंद जा बसी सीप मेंं।
उफ ! कहां तुम ! बस याद।
रात भर हाय बस तेरी याद आई।
स्वर्गीय प्रेमशंकर पाण्डेय
गोरखपुर

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