ये ऐसी दो युवतियो की कहानी है ।जो मिलन के साथ "शुरु और बिछोह के साथ "अन्त तक की प्रेम कहानी है, मूझे नही पता इस में अच्छाई या बुराई क्या है !अपितु मेरा मानना ये आज की पीढी की ज्वलन्त समस्या हैं , मैने बस आपलोगो की कसौटी पर खरी उतर जाए ,इस बात की पूरी कोशिश की है !🙏✍️
मुझे ऐसे लोग बिल्कुल पसन्द नही जो शादी किसी और से ,और प्यार किसी और से, करे ,पखुडी अपनी जेठनी, से बोली ,जेठानी सरिता जबाब में सिर्फ मुस्कुरा दी ,दोनो जल्दी जल्दी काम निपटाने में लग गयी ,बच्चे स्कूल से आने वाले थे , पखुडी कुछ मैडिकल प्राब्लम की वजह से अब तक माँ न बन सकी ,थी" उसका पति राकेश उसे बहुत चाहता था ,मजाल की उसने कुछ चाहा हो और उसे मिला न हो, उसके दूर के रिश्ते की मौसेरी बहेन थी जो उससे तीन चार साल छोटी थी। उस की शादी उसके ही रिश्ते मे हुई थी। यही से शुरू हुआ गलतफहमियो का सफर, पलक उसकी मौसेरी बहन जो की अपने पति समीर को हमेशा पखुडी के प्रति भडकाती रहती थी! वजह पखुडी और समीर मे अपना पन ज्यादा होना .हालकि की पलक ओर समीर ने सबके खिलाफ जाके शादी की थी! पर अपने पति के मुंह से पखुडी की तारीफ़ पलक को ,जरा भी न भाती पलक ,पखुडी को नीचा गिराने की हमेशा कोशिश में लगी रहती, समय के साथ बडे मान मनौवल के बाद पखुडी ने एक बेटे को जन्म दिया !बेटे के जन्म के बाद उसके मान सम्मान मे चार चांद लग गये! पखुडी खूबसूरती से लेकर हर कार्य मै दक्ष ,परिवार मे सबकी लाडली चहेती बहू थी! उसका परिवार के प्रति समर्पण, उसे सबसे अलग करता था! समय बदला पर उसमें लेश मात्र बदलाव न आया. इन्ही दस बाराह सालो समीर का आना जाना ज्यादा हो गया !समीर और राकेश की दोस्ती , फिर रिश्ता 'समीर मे राकेश की जान बसती थी! वो दोनों पास होते तो सब को भूल जाते,, समीर हसमुख और दिलेर था! पर वो पंखुडी को हमेशा छेडता रहता ,,कुछ समय से पंखुडी नोटिस कर रही थी की , समीर उसके ज्यादा करीब आ रहा है !पर वो उससे छोटा है !अपनी ही सोच पर हँसी आती, इधर समीर के मन में पंखुडी के लिए इज्जत बढती जा रही थी !वो जितना पंखुडी के नजदीक आता, उतना ही लगाव बढता जाता ,कई सालो की कोशिश के बाद भी पलक के मन में शक का बीज पलता रहा ,इसका नतीजा ये हुआ उसने जितना समीर को दूर करना चाहा ,वो पंखुडी के और पास आता गया ! इन सब बातों से अनभिज्ञ पंखुडी अपनी मस्ती में जीती रही ,,,उसका बेटा उसका पति बस वो उसी दुनिया में खोई रही, समय के साथ उसकी तकदीर में विधाता ने कुछ और लिख रखा था! एक दिन अचानक समीर ने उससे बोला, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो , वो निरुतर हो गई ,पर अब वो समीर से नजरे चुराने लगी, उसके घर आने पर उसकी पूरी कोशिश रहती की,,समीर, उसके सामने न पडे समीर की हसी मजाक की , आदत से सब परिचित थे !वो राकेश के सामने ही पंखुडी को छेड देता! राकेश भी उसका साथ देता !कभी कभी पंखुडी चिढ जाती, तो वो माफी मांग लेता ,जाते जाते बोल कर जाता समीर हू ,हवा का झोका, सर्दी तो देकर जाऊगा! कभी तो वो पंखुडी का सेलफोन लेकर राकेश और पंखुडी की पर्सनल बाते पढता ,फिर सबके सामने बच्चों जैसा सबको पढकर सुनाता ,...न चाहते हुए भी अपनी मसूमियत की वजह से दोनो की दिल में बस चुका था! समीर का बचपना दोनों के लिए कुछ लोगों के मन में शक का बीज बोने लगा, आज राकेश ने छुट्टी ली थी! राकेश पंखुडी बाते कर रहे थे! राकेश कुछ रोमाटिक मूड मे थे। तभी समीर रुम में आ गया। क्या चल रहा है लव वर्डस. हमको भी शमिल कर लो, पंखुडी झेप गई, और वो नहाने बाथरुम मे घुस गई , कुछ देर बाद बाहर निकली तो राकेश किसी काम से बाहर चला गया था! अब आप भी बाहर तशरीफ लेगे ,,,,,,, नही,, जाऊगा समीर ने ढीटता दिखाई, और सेलफोन से फोटो लेने लगा !इतना मजाक अच्छा नही ,,पंखुडी सेलफोन छीनती हुई बोली, तभी उसका पैर पैर दान में फस गया !और वो समीर के ऊपर गिर पडी, समीर एक झटके से उठा और साँरी बोलते हुऐ बाहर निकल गया! परिवार के किसी सदस्य ने शायद ये घटना देख ली थी!""""""
आगे जारी भाग--२

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