मै वीर रस भरी ,मै हारती नही हूँ ।
हिम्मत से सामना कर ,
अपनी जीत पर अडी हूँ।
सोचती वही मै
जो जीत की सहेली हो
कायरो से दूर जा ,
हिम्मत से जा मिली हूँ ।
मै वीर रस भरी .............
आती मुश्किलों मै ,
दूर से पछाड़ती हूँ,
डूबती आशा को भी
तिनके से सँवारती ...
मै वीर रस से भरी ........
समस्या को मै भूलकर,
समाधान ही ढूढती ,
मै हार की नही ,
बस जीतने की सोचती ।
मै वीर रस से भरी ........
क्यो डरू मै ,क्यो मरू,
जब जीवन सवाँरती
राम ,कृष्ण को भी ,
दो थपकियाँ लगाती हूँ ।
मै वीर रस से भरी ,
मै हारती नही हूँ ।
हिम्मत से सामना कर ,
अपनी जीत पर अडी हूँ ।।
मीनाक्षी शर्मा

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