अच्छा चाचा अब चलते है ,चन्द्रेश उठने का उपक्रम करते हुऐ बोला,,
मै भी चलता हूँ,साथ मे,अतुल चाचा भी साथ मे चल दिऐ""
टेम्पो वाले को इशारा कर पैदल ही चाचा जी के पीछे चल पडा चन्द्रेश"""""
सडके चौडी ,और अच्छी हालत मे थी'नुक्कड से दो गलियाँ पार करते ही'सामने ही दिखने लगा हवेलीनुमा घर नीरु नीचे नजरे,गडाये ,बस बाबा के पैरो के निशान के साथ चल रही थी""""घर के सामने कब आकर खडे हो गये पता ही न चला""""
कई घरो से दरवाजे और खिडकियों से लोग झाँकने लगे"
पास के घर से एक अधेंड महिला "चन्द्रेश के पास आकर खडी हो गई""और गौर से उसे देखने लगी,"""
फिर,झपट कर उसे ,गले लगा लिया,अरे मेरा चन्दू आ गया""
हाँ विमला ,काकी मै वापस आ गया 'चन्दू ने झुककर ,विमला काकी के चरण पकड लिऐ,,क्यू इतनी देर
कर दी,बेटा पूरा परिवार बिखर गया।
दोनो बच्चे ठगे से ,उन्है देखे जा रहे थे''''
काकी,ने एक बच्चे को आवाज दी"वो बच्चा सामने आकर खडा हो गया""":
जा बेटा ,हरिया को बुलाकर ला,बोलना छोटे मालिक, आ गये है,जल्दी,हवेली की चाभी लेकर आये"जी बडी अम्मा"""
वो बच्चा कुछ दूर जाकर हवेली के पिछले हिस्से मे गायब हो गया""
कुछ ही देर मे,एक अधेडं सा दिखने वाला आदमी दौडकर आया " और चन्द्रेश के कदमो मे,गिर गया,,,
अरे हरिया काका उठो,ऐसा मत करो,नही मलिक,आज मत रोको"और हरिया की आँखो से अविरल अँसुओ की धारा बह निकली""""
हरिया काका ऐसा करोगे,तो हम फिर वापस चले जायेगे""
नही मलिक शुभ शुभ बोलो"
और अपनी बाहों की आस्तीन से आँसू पोछने लगा""""
अब टेम्पो भी,हवेली के सामने आकर खडा हो गया था।
हरिया ने,ताला खोला और चन्द्रेश की ओर मुखातिब  हुआ,
अन्दर चलिऐ मालिक,,,,,,,
जी काका,,,हरिया की नजर नीरु और  छोटे पर पडी,तो छोटे को गोद मे उठा लिया"और नीरु का हाथ पकड हवेली के अन्दर ले आया"""""
काका यहाँ तो कुछ नही बदला,,,,,चन्द्रेश बोला"""
तो सँवरा ही कहाँ मलिक, आपके जाने के बाद ,नीरु हरिया काका की ओर उत्सुकता से देखने लगी """""
उसके लिऐ ,ये सब सपने से कम न था"""""
काका पहले फ्रेश हो जाऐ ,फिर आगे की बातें,,,जी मालिक
हवेली पहले जैसी साफ सुथरी थी ! करीने से रखा हुआ सारा सामान,,,,,,
मालिक ,खाने मे क्या बना दे"हारिया काका जो आपका दिल करे,  हारिया रसोईघर की ओर बढा ,फिर मुडकर वापस आ गया,   नीरू अब तक अजनबी जैसी सोफे पर बैठी  थी,,बिटिया,,,नीरु ने नही सुना,बिटिया मै आपसे ही बात कर रहा हूँ!!!
जी,दादा ,चौक कर बोल उठी,नीरु""""खाने मे क्या बनाऊँ बिटियाँ,,मूगँ की दल साग रोटी""""बिटियाँ ये खाना आप खा लोगे"""और मलिक ,हरिया बोला""बाबा भी खा लेते है""
पर मूंग तो उसे एलर्जी करते है,,,,
नही तो"""""अब चौकने की बारी हरिया की थी"""""



रीमा महेन्द्र ठाकुर (लेखिका)
कृमशः
आगे जारी -भाग-12"":
प्रिये पाठको 🙏🏼✍️🏻अपना स्नेह और अशीर्वाद बनाऐ रखिऐगा 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼