रात का तीसरा पहर था ,,बाहर से कुछ आवाजे आने लगी"
बाहर शायद कोई गाडी आकर खडी हुई थी!
अब तक ,रो रोकर नीरू का बुरा हाल हो चुका था!
नीरु को होश न था।
शायद बाबा आ गये थे!
नीरू ने सिर पर ममता भरे हाथो को महसूस किया'कुछ सचेत हुई,,नजरें उठाई बाबा ,भरी आँखो से उसे ही देख रहे थे"""""
बाबा .नीरू बाबा से लिपट गई,बाबा कुछ न बोल पाये, उनका ,गला रूधं गया""""
बाबा वही जमीन पर बैठ गये बहुत देर तक अपनी जीवनसंगिनी को स्थिरता से देखते रहे,,"""
बाबा का मन हहाकार कर रहा था'"""""
बीस साल का साथ ,नजरो के सामने,चलचित्र बनकर तैरने
लगा,"""
अभी भी वही रूप--- ओह ""लाल साडी मे लिपटी दमयंती
मनो उनके समक्ष खडी हो गई,""""
वो सुबक पडे"शर्ट की आस्तीन से आँसुओ को पोछने लगे"
मन ही मन बुदबुदाये,दमयंती छोड गई न अकेला मुझे"""""
ओर भरभरा कर रो पडे"""""
काकी पास आ गई--बऊआ जी सम्भालो खुद को ऐसे कैसे
चलेगा,''''
धीरज धरो दो बच्चों का सोचो,,वो अपनी अमानत छोड गई
है""""
बाबा मन ही मन बडबडाये जा रहे थे!वही तो उसके साथ जा भी नही सकता,उसने मेरे लिऐ कोई,रास्ता ही नही छोडा"""""
और सुबकने लगे,पुरूष की वेदना"वो तो जता भी नही सकता,,दुःख का पहाड़ टूट पडा था ,,बाबा पर""""""
नीरू ,अब भी बाबा से चिपकी थी"""
रात धीरे धीरे भोर मे बदल रही थी,,
सुबह होते ही पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो गया,,रास्ते मे कही पैर रखने की जगह न थी"""
क्रियाकर्म ,की तैयारी शुरु हो गई ''सारे रिश्ते नाते वाले आ गये थे"
नीरू बीच बीच मे आँखे ,खोलकर देख लेती"""
पर उसे ,कुछ समझ न आता'माँ को नहलाया जा रहा था"
कुछ बुजुर्ग महिलाओ की देखरेख मे सारे रिवाज निभाये जा रहे थे!"""":
माँ को लाल साडी पहेना दी गई थी"बिल्कुल दुल्हन सजी सँवरी ,कितनी भली ममता से सरोबार "
छोटा भाई भी अब तक आ चुका था।वो सामने ही खडा था"
वो पास आ गया'बडे गौर से माँ को देख रहा था""""
पर समझ कुछ न पा रहा था।
दीदी """"हूँ """इतने सारे लोग क्यू अपने घर पर क्यू आये है।
माँ ,नये कपडे पहनकर नीचे क्यू सोयी है"""
नीरू ने आँखे खोली,और भाई को झपट कर अलिगंन मे भर लिया"सबकी सिसकियों से एक बार महौल फिर गमगीन हो गया!
कुछ महिलाओ को बच्चों पर दया आयी"उन्हें,उठाकर कमरे मे ले गई """"
अभी कुछ समय ही बीता होगा,बाहर से जोर जोर से रोने की ,आवाज आने लगी'ये तो बाबा की आवाज है """
नीरू,दौडकर बाहर आ गई"""""
बाबा,माँ की माँग मे सिन्दूर भर रहे थे"वो वही अवाक खडी
देखती रही'मधू नीरू को अपने साथ ले आयी"
नीरू ने मधू के कंधे पर सिर रख लिया "मधू उसके सिर पर हाथ फेरने लगी ,नीरू ने फिर से आँखे बंद कर ली"
कुछ समय बाद मधू बोली"नीरू आँखे खोल, चाची जी को अखिरी बार देख ले,उन्हैं ले जा रहे है""""
कहाँ""नीरू मे जैसै फुर्ती आ गई "वो माँ से लिपट गई""
कुछ लोगो ने नीरू को सम्भला "माँ को अर्थी पर सुला दिया,
फूलमाला से सजा दिया"बाबा रो रहे थे,नीरू चीख रही थी"नीरू की कोई नही सुन रहा था"""""
एक बुजुर्ग बोले ,देर न करो,मिट्टी खराब करने से क्या फायदा""""मिट्टी तो क्या मा़ँ,, मिट्टी हो गई'माँ मेरी आँखो के सामने संजी संवरी लेटी है!मिट्टी कैसे हो सकती है"
नीरू ,को परे कर,चार लोगो ने अर्थी को उठाया"राम नाम सत्य है""नीरू अचेत होकर जमीन पर गिर गई"""""कृमशः
आगे जारी"""""भाग-5""""""
रीमा ठाकुर(लेखिका)
प्रिये ""आपको ये भाग कैसा लगा,कृपया समीक्षा मे जरूर बताऐ आभार🙏🙏🙏🙏



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