चिता,,धू धू कर जल रही थी"और चन्द्रेश ,अब भी आग की लपटो को,तटस्था,से देखे जा रहा था,
भावशून्य और मूक सा""""""""""
,पंचत्व से बना शरीर कुछ ही घन्टो मे विलीन हो
चुका था।
उसकी पत्नी राख की ढेरी मे तब्दील हो चुकी था"""
और वो खुद भी ,बेजान बन चुका था"
चन्द्रेश बेटा ,चलो घर चले""चन्द्रेश ने गरदन उठाकर "काका की ओर देखा,पर जबाब कुछ नही दिया,वो मूक हो चुका था।
बेटा "चलो ,पता नही घर मे बच्चों की क्या हालत होगी""""
बच्चे ,,,हा काका चलो,""""""
चन्द्रेश, उठकर घर की ओर चल पडा,चन्द्रेश बेटा रूको,====
चन्द्रेश के कदम ठिठक गये" उसकी आँखे बेजान हो गई,
अभी अभी "तो वो अपनी,दुनिया को""राख मे तब्दीँल करके आया है """काका उसके सामने आ गये ,,,वो भाव शून्य सा उन्हे देखता रहा"""":
काका ज्यादा देर तक इस हाल मे उसे नही देख पाये=,
काका के सब्र का बाँध टूट गया"""""
झपट कर चन्द्रेश को गले लगा लिया""""
मेरे बेटे ,खुद को सम्भाल,नही तो बच्चो को कौन सम्भालेगा,"""""""
नीरू ,को अभी तक होश न आया था"""""
सब महिलाऐं उसे घेरे खडी थी"
अपने -अपने नजरिऐ से,उसे होश मे लाने का प्रयत्न कर रही थी।""""":
डाक्टर भी आ गये थे"इंजेक्शन दे दिया था,,
अब वो सो चुकी थी"
कुछ घन्टो के बाद नीरु को होश आया"""""
वो उठकर बैठ गई ,,और जोर जोर से रोने लगी """"
चन्द्रेश ने अब तक खुद को कुछ हद तक सम्भाल लिया था"""नीरू की आवाज सुनकर वो"कमरें की ओर भागा""""""
नीरू को गले लगा कर उसे चुप करने लगा"""""
मेरे,बहादुर बच्चे,चुप हो जा""""""
बाबा मा़ँ"""""ःऔर सुबक पडी नीरू,"""""""
बच्चे हम है ना,तुम्हारे बाबा,,तुम्हें हम बहुत प्यार करते है""""
तभी पास नीरज भी आ गया"""""बहुत सारे सवाल उसकी आँखो मे तैर रहे थे"""""""कृमशः आगे जारी भाग- 6-
रीमा ठाकुर(लेखिका)
प्रिये पाठको प्रणाम🙏
आपको ये भाग कैसा लगा आप समीक्षा मे जरुर बताऐ


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